अपठित गद्यांश बोध 1
علم اور عمل کا باہمی تعلق انسانی زندگی کی بنیاد ہے۔ محض کتابی علم حاصل کر لینا کافی نہیں ہوتا، جب تک اسے عملی زندگی میں استعمال نہ کیا جائے۔ ایک طالب علم جو دن رات کتابوں کے انبار میں گم رہتا ہے لیکن عملی میدان میں قدم رکھنے سے گھبراتا ہے، وہ کبھی حقیقی کامیابی حاصل نہیں کر سکتا۔ دوسری طرف، وہ افراد جو علم کے ساتھ ساتھ تجربے اور مشاہدے کو بھی اہمیت دیتے ہیں، وہ زندگی کے ہر شعبے میں نمایاں ہوتے ہیں۔
تدریس کا اصل مقصد طلبا کو صرف معلومات فراہم کرنا نہیں، بلکہ ان کی سوچنے، پرکھنے اور مسائل حل کرنے کی صلاحیت کو پروان چڑھانا ہے۔ ایک اچھا استاد وہی ہے جو اپنے طلبا کو رٹنے کی بجائے سمجھنے کی ترغیب دے۔ جب طلبا کو کسی مسئلے کا حل خود نکالنے کا موقع دیا جاتا ہے، تو ان کی تخلیقی صلاحیتیں ابھر کر سامنے آتی ہیں۔ اس کے برعکس، صرف لیکچر دینے اور نوٹس لکھوانے والا طریقہ کار طلبا کو غیر فعال بنا دیتا ہے۔
لہٰذا، تعلیمی نظام کو اس طرح ڈھالنا چاہیے کہ علم اور عمل دونوں ساتھ ساتھ چلیں۔ غلطیاں کرنا سیکھنے کا حصہ ہے، اور ان غلطیوں سے سبق سیکھ کر آگے بڑھنا ہی کامیابی کی کنجی ہے۔
(इल्म और अमल का बाहमी ताल्लुक इंसानी जिंदगी की बुनियाद है। महज किताबी इल्म हासिल कर लेना काफी नहीं होता, जब तक उसे अमली जिंदगी में इस्तेमाल न किया जाए। एक तालिबे इल्म जो दिन रात किताबों के अंबार में गुम रहता है लेकिन अमली मैदान में कदम रखने से घबराता है, वह कभी हकीकी कामयाबी हासिल नहीं कर सकता। दूसरी तरफ, वे अफराद जो इल्म के साथ-साथ तजुर्बे और मुशाहिदे को भी अहमियत देते हैं, वे जिंदगी के हर शोबे में नुमायां होते हैं।
तद्रीस का असल मकसद तुलबा को सिर्फ मालूमात फराहम करना नहीं, बल्कि उनकी सोचने, परखने और मसाइल हल करने की सलाहियत को परवान चढ़ाना है। एक अच्छा उस्ताद वही है जो अपने तुलबा को रटने की बजाय समझने की तरगीब दे। जब तुलबा को किसी मसले का हल खुद निकालने का मौका दिया जाता है, तो उनकी तखलीकी सलाहियतें उभर कर सामने आती हैं। इसके बरक्स, सिर्फ लेक्चर देने और नोट्स लिखवाने वाला तरीका-कार तुलबा को गैर फाइल बना देता है।
लिहाजा, तालीमी निजाम को इस तरह ढालना चाहिए कि इल्म और अमल दोनों साथ-साथ चलें। गलतियां करना सीखने का हिस्सा है, और इन गलतियों से सबक सीख कर आगे बढ़ना ही कामयाबी की कुंजी है।)
Q. 1- علم اور عمل کا باہمی تعلق کس کی بنیاد ہے؟
(इल्म और अमल का बाहमी ताल्लुक किसकी बुनियाद है?)
(A) صرف کتابوں کی
(सिर्फ किताबों की)
(B) انسانی زندگی کی
(इंसानी जिंदगी की)
(C) صرف تجارت کی
(सिर्फ तिजारत की)
(D) صرف کھیل کود کی
(सिर्फ खेल कूद की)
Ans. - انسانی زندگی کی
(इंसानी जिंदगी की)
Q. 2- محض کتابی علم حاصل کر لینا کیسا ہوتا ہے؟
(महज किताबी इल्म हासिल कर लेना कैसा होता है?)
(A) کافی ہوتا ہے
(काफी होता है)
(B) کافی نہیں ہوتا
(काफी नहीं होता)
(C) بہت مفید ہوتا ہے
(बहुत मुफीद होता है)
(D) کامیابی کی کنجی ہے
(कामयाबी की कुंजी है)
Ans. - کافی نہیں ہوتا
(काफी नहीं होता)
Q. 3- کون سے افراد زندگی کے ہر شعبے میں نمایاں ہوتے ہیں؟
(कौन से अफराद जिंदगी के हर शोबे में नुमायां होते हैं?)
(A) جو صرف کتابیں پڑھتے ہیں
(जो सिर्फ किताबें पढ़ते हैं)
(B) جو عملی میدان سے گھبراتے ہیں
(जो अमली मैदान से घबराते हैं)
(C) جو علم کے ساتھ تجربے اور مشاہدے کو اہمیت دیتے ہیں
(जो इल्म के साथ तजुर्बे और मुशाहिदे को अहमियत देते हैं)
(D) جو دن رات سوتے رہتے ہیں
(जो दिन रात सोते रहते हैं)
Ans. - جو علم کے ساتھ تجربے اور مشاہدے کو اہمیت دیتے ہیں
(जो इल्म के साथ तजुर्बे और मुशाहिदे को अहमियत देते हैं)
Q. 4- تدریس کا اصل مقصد کیا ہے؟
(तद्रीस का असल मकसद क्या है?)
(A) صرف معلومات فراہم کرنا
(सिर्फ मालूमात फराहम करना)
(B) صرف نوٹس لکھوانا
(सिर्फ नोट्स लिखवाना)
(C) سوچنے، پرکھنے اور مسائل حل کرنے کی صلاحیت کو پروان چڑھانا
(सोचने, परखने और मसाइल हल करने की सलाहियत को परवान चढ़ाना)
(D) صرف امتحان پاس کرانا
(सिर्फ इम्तिहान पास कराना)
Ans. - سوچنے، پرکھنے اور مسائل حل کرنے کی صلاحیت کو پروان چڑھانا
(सोचने, परखने और मसाइल हल करने की सलाहियत को परवान चढ़ाना)
Q. 5- ایک اچھا استاد اپنے طلبا کو کس چیز کی ترغیب دیتا ہے؟
(एक अच्छा उस्ताद अपने तुलबा को किस चीज की तरगीब देता है?)
(A) رٹنے کی
(रटने की)
(B) سمجھنے کی
(समझने की)
(C) کھیلنے کی
(खेलने की)
(D) بولنے کی
(बोलने की)
Ans. - سمجھنے کی
(समझने की)
Q. 6- طلبا کی تخلیقی صلاحیتیں کب ابھر کر سامنے آتی ہیں؟
(तुलबा की तखलीकी सलाहियतें कब उभर कर सामने आती हैं?)
(A) جب انہیں لیکچر دیا جاتا ہے
(जब उन्हें लेक्चर दिया जाता है)
(B) جب انہیں نوٹس لکھوائے جاتے ہیں
(जब उन्हें नोट्स लिखवाए जाते हैं)
(C) جب انہیں مسئلے کا حل خود نکالنے کا موقع دیا جاتا ہے
(जब उन्हें मसले का हल खुद निकालने का मौका दिया जाता है)
(D) جب انہیں سزا دی جاتی ہے
(जब उन्हें सजा दी जाती है)
Ans. - جب انہیں مسئلے کا حل خود نکالنے کا موقع دیا جاتا ہے
(जब उन्हें मसले का हल खुद निकालने का मौका दिया जाता है)
Q. 7- صرف لیکچر دینے اور نوٹس لکھوانے والا طریقہ کار طلبا کو کیسا بنا دیتا ہے؟
(सिर्फ लेक्चर देने और नोट्स लिखवाने वाला तरीका-कार तुलबा को कैसा बना देता है?)
(A) فعال
(फाइल)
(B) غیر فعال
(गैर फाइल)
(C) بہت ذہین
(बहुत जहीन)
(D) بہت تخلیقی
(बहुत तखलीकी)
Ans. - غیر فعال
(गैर फाइल)
Q. 8- کامیابی کی کنجی کیا ہے؟
(कामयाबी की कुंजी क्या है?)
(A) غلطیوں سے سبق سیکھ کر آگے بڑھنا
(गलतियों से सबक सीख कर आगे बढ़ना)
(B) غلطیوں پر ہار مان لینا
(गलतियों पर हार मान लेना)
(C) صرف کتابی علم پر انحصار کرنا
(सिर्फ किताबी इल्म पर इन्हिसार करना)
(D) عملی میدان سے بھاگ جانا
(अमली मैदान से भाग जाना)
Ans. - غلطیوں سے سبق سیکھ کر آگے بڑھنا
(गलतियों से सबक सीख कर आगे बढ़ना)
अपठित पद्यांश बोध 2
ہمت کے آگے پہاڑ بھی جھکتے ہیں،
منزل کی طرف بڑھنے والے کبھی نہیں رکتے۔
اندھیری راتوں کے بعد ہی سورج نکلتا ہے،
صبر کرنے والا ہی منزل کو پاتا ہے۔
گر راستے میں کانٹے ہوں تو گھبرانا نہیں،
اپنے حوصلے اور ہمت کو کھونا نہیں۔
ہر مشکل کے بعد آسانی کا وعدہ ہے،
محنت کرنے والے کا اللہ نے مدد کا وعدہ ہے۔
جو اپنے خوابوں پر یقین رکھتا ہے،
وہ ہر مشکل سے لڑ کر آگے بڑھتا ہے۔
کوشش کرنے والے کی کبھی ناکامی نہیں ہوتی،
بس اس کے ارادوں میں کمی نہیں ہوتی۔
(हिम्मत के आगे पहाड़ भी झुकते हैं,
मंजिल की तरफ बढ़ने वाले कभी नहीं रुकते।
अंधेरी रातों के बाद ही सूरज निकलता है,
सब्र करने वाला ही मंजिल को पाता है।
गर रास्ते में कांटे हों तो घबराना नहीं,
अपने हौसले और हिम्मत को खोना नहीं।
हर मुश्किल के बाद आसानी का वादा है,
मेहनत करने वाले का अल्लाह ने मदद का वादा है।
जो अपने ख्वाबों पर यकीन रखता है,
वह हर मुश्किल से लड़ कर आगे बढ़ता है।
कोशिश करने वाले की कभी नाकामी नहीं होती,
बस उसके इरादों में कमी नहीं होती।)
Q. 1- ہمت کے آگے کیا جھکتا ہے؟
(हिम्मत के आगे क्या झुकता है?)
(A) پہاڑ
(पहाड़)
(B) دریا
(दरिया)
(C) آسمان
(आसमान)
(D) طوفان
(तूफान)
Ans. - پہاڑ
(पहाड़)
Q. 2- منزل کی طرف بڑھنے والے کیا نہیں کرتے؟
(मंजिल की तरफ बढ़ने वाले क्या नहीं करते?)
(A) رکتے
(रुकते)
(B) چلتے
(चलते)
(C) سوچتے
(सोचते)
(D) دیکھتے
(देखते)
Ans. - رکتے
(रुकते)
Q. 3- نظم کے مطابق اندھیری راتوں کے بعد کیا نکلتا ہے؟
(नज्म के मुताबिक अंधेरी रातों के बाद क्या निकलता है?)
(A) چاند
(चांद)
(B) سورج
(सूरज)
(C) تارے
(तारे)
(D) بادل
(बादल)
Ans. - سورج
(सूरज)
Q. 4- منزل کون پاتا ہے؟
(मंजिल कौन पाता है?)
(A) جو صبر کرتا ہے
(जो सब्र करता है)
(B) جو جلدی کرتا ہے
(जो जल्दी करता है)
(C) جو ڈرتا ہے
(जो डरता है)
(D) جو سوتا ہے
(जो सोता है)
Ans. - جو صبر کرتا ہے
(जो सब्र करता है)
Q. 5- راستے میں کانٹے ہوں تو کیا کرنا چاہیے؟
(रास्ते में कांटे हों तो क्या करना चाहिए?)
(A) گھبرانا نہیں
(घबराना नहीं)
(B) رونا
(रोना)
(C) رک جانا
(रुक जाना)
(D) واپس لوٹ جانا
(वापस लौट जाना)
Ans. - گھبرانا نہیں
(घबराना नहीं)
Q. 6- ہر مشکل کے بعد کس چیز کا وعدہ ہے؟
(हर मुश्किल के बाद किस चीज का वादा है?)
(A) خوشی کا
(खुशी का)
(B) آسانی کا
(आसानी का)
(C) غم کا
(गम का)
(D) تکلیف کا
(तकलीफ का)
Ans. - آسانی کا
(आसानी का)
Q. 7- کوشش کرنے والے کی کبھی کیا نہیں ہوتی؟
(कोशिश करने वाले की कभी क्या नहीं होती?)
(A) کامیابی
(कामयाबी)
(B) ناکامی
(नाकामी)
(C) ترقی
(तरक्की)
(D) عزت
(इज्जत)
Ans. - ناکامی
(नाकामी)
उत्तर शीट
Q. 1. Ans. (B)
Q. 2. Ans. (B)
Q. 3. Ans. (C)
Q. 4. Ans. (C)
Q. 5. Ans. (B)
Q. 6. Ans. (C)
Q. 7. Ans. (B)
Q. 8. Ans. (A)
Q. 9. Ans. (A)
Q. 10. Ans. (A)
Q. 11. Ans. (B)
Q. 12. Ans. (A)
Q. 13. Ans. (A)
Q. 14. Ans. (B)
Q. 15. Ans. (B)
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