माध्यमिक शिक्षक चयन परीक्षा - हिन्दी भाषा अपठित बोध एवं अभ्यास सेट

यह सामग्री माध्यमिक शिक्षक चयन परीक्षा के पाठ्यक्रम के अनुरूप भाषायी समझ, अवबोध, व्याकरण और मौखिक योग्यता को परखने के लिए तैयार की गई है। इसमें कुल 4 गद्यांश और 4 पद्यांश (कुल 8 अपठित) तथा उनके नियत वैकल्पिक प्रश्न दिए गए हैं।

अपठित गद्यांश 1 (साहित्यिक एवं सामाजिक समरसता पर आधारित)

भारतीय संस्कृति का मूल आधार सनातन सहिष्णुता और विविधता में एकता का दर्शन रहा है। आधुनिक युग में वैश्वीकरण और तकनीकी प्रगति के तीव्र वेग ने जहाँ एक ओर भौतिक सुविधाओं के द्वार खोले हैं, वहीं दूसरी ओर सामाजिक ताने-बाने और मानवीय संवेदनाओं के समक्ष गंभीर चुनौतियाँ भी उत्पन्न की हैं। आज मनुष्य अपनी जड़ों से कटकर उपभोगवादी संस्कृति का अंधानुकरण कर रहा है, जिसके परिणाम स्वरूप वैयक्तिक अलगाव, मानसिक तनाव और सांस्कृतिक प्रदूषण जैसी प्रवृत्तियाँ समाज में तेजी से घर कर रही हैं। ऐसे समय में साहित्य की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज का दर्पण और उसका विवेक है। जब समाज दिशाहीन होने लगता है, तब साहित्यकार अपनी सृजनात्मक चेतना से मूल्यों का पुनर्सृजन करता है। वह व्यक्ति को उसकी मानवीय गरिमा का स्मरण कराता है और उसे यह सिखाता है कि भौतिक प्रगति के साथ आंतरिक शुचिता और नैतिक उत्थान कितना अनिवार्य है। सामाजिक समरसता का वास्तविक अर्थ केवल भिन्न समुदायों का सह-अस्तित्व नहीं, बल्कि एक-दूसरे के प्रति आदर भाव और परस्पर सहानुभूति का जीवंत संचार है। यदि शिक्षा और साहित्य दोनों मिलकर नई पीढ़ी में इस विवेक का बीजारोपण करें, तो हम एक संतुलित और मानवीय समाज की स्थापना कर सकते हैं।

गद्यांश 1 के वैकल्पिक प्रश्न

प्रश्न 1- भारतीय संस्कृति का मूल आधार निम्नलिखित में से किसे माना गया है?

(A) तीव्र तकनीकी प्रगति और वैश्वीकरण
(B) भौतिक सुख-सुविधाओं का विस्तार
(C) सनातन सहिष्णुता और विविधता में एकता का दर्शन
(D) उपभोगवादी संस्कृति का अंधानुकरण
उत्तर - (C) सनातन सहिष्णुता और विविधता में एकता का दर्शन
विश्लेषण - गद्यांश की आरंभिक पंक्ति स्पष्ट करती है कि भारतीय संस्कृति का मूल आधार सनातन सहिष्णुता और विविधता में एकता का दर्शन रहा है।

प्रश्न 2- आधुनिक युग में मनुष्य के समक्ष कौन सी गंभीर प्रवृत्तियाँ उत्पन्न हुई हैं?

(A) वैयक्तिक अलगाव, मानसिक तनाव और सांस्कृतिक प्रदूषण
(B) नैतिक दृढ़ता और सामुदायिक सहयोग
(C) मानवीय संवेदनाओं का अभूतपूर्व विकास
(D) प्राचीन परंपराओं का गौरवशाली पुनरुत्थान
उत्तर - (A) वैयक्तिक अलगाव, मानसिक तनाव और सांस्कृतिक प्रदूषण
विश्लेषण - गद्यांश में उल्लेख है कि उपभोगवादी संस्कृति के अंधानुकरण से वैयक्तिक अलगाव, मानसिक तनाव और सांस्कृतिक प्रदूषण जैसी प्रवृत्तियाँ बढ़ी हैं।

प्रश्न 3- गद्यांश के अनुसार साहित्य की वास्तविक भूमिका क्या है?

(A) केवल मनोरंजन करना और समसामयिक प्रवृत्तियों को छुपाना
(B) समाज का दर्पण बनना और मूल्यों का पुनर्सृजन करना
(C) भौतिक संसाधनों के संवर्धन में सहायता प्रदान करना
(D) तकनीकी विकास के नए द्वार खोलना
उत्तर - (B) समाज का दर्पण बनना और मूल्यों का पुनर्सृजन करना
विश्लेषण - गद्यांश के अनुसार साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि समाज का दर्पण और विवेक है, जो मूल्यों का पुनर्सृजन करता है।

प्रश्न 4- सामाजिक समरसता का वास्तविक अर्थ गद्यांश में क्या बताया गया है?

(A) केवल भिन्न समुदायों का एक ही भौगोलिक क्षेत्र में रहना
(B) एक-दूसरे के प्रति आदर भाव और परस्पर सहानुभूति का संचार
(C) आर्थिक दृष्टि से सभी वर्गों का समान स्तर पर होना
(D) प्राचीन मान्यताओं का पूर्णतः त्याग करना
उत्तर - (B) एक-दूसरे के प्रति आदर भाव और परस्पर सहानुभूति का संचार
विश्लेषण - गद्यांश में स्पष्ट किया गया है कि सामाजिक समरसता का अर्थ केवल सह-अस्तित्व नहीं बल्कि आदर भाव और परस्पर सहानुभूति का जीवंत संचार है।

प्रश्न 5- 'उपभोगवादी' शब्द में कौन सा प्रत्यय जुड़ा हुआ है?

(A) वादी
(B) ई
(C) भोग
(D) उप
उत्तर - (A) वादी
विश्लेषण - 'उपभोग' मूल शब्द में 'वादी' प्रत्यय जुड़ने से 'उपभोगवादी' विशेषण शब्द का निर्माण होता है।

प्रश्न 6- 'आंतरिक' शब्द का विलोम शब्द निम्नलिखित में से कौन सा होगा?

(A) बाहरी
(B) बाह्य
(C) प्रागैतिहासिक
(D) नैसर्गिक
उत्तर - (B) बाह्य
विश्लेषण - 'आंतरिक' का सर्वथा उपयुक्त विलोम शब्द 'बाह्य' होता है, जो व्याकरणिक दृष्टि से सटीक है।

प्रश्न 7- गद्यांश में प्रयुक्त 'शुचिता' शब्द का उचित अर्थ क्या है?

(A) स्वच्छता या पवित्रता
(B) चंचलता
(C) कठोरता
(D) आधुनिकता
उत्तर - (A) स्वच्छता या पवित्रता
विश्लेषण - 'शुचिता' का शाब्दिक और वैचारिक अर्थ पवित्रता या शुद्धता से है, यहाँ नैतिक शुचिता के संदर्भ में प्रयुक्त है।

प्रश्न 8- गद्यांश का केंद्रीय भाव या मूल संदेश क्या है?

(A) भौतिक विकास को पूरी तरह अस्वीकार करना
(B) केवल तकनीकी शिक्षा पर बल देना
(C) भौतिक प्रगति के साथ नैतिक उत्थान और सामाजिक समरसता की अनिवार्यता
(D) पाश्चात्य संस्कृति का आँख मूँदकर अनुकरण करना
उत्तर - (C) भौतिक प्रगति के साथ नैतिक उत्थान और सामाजिक समरसता की अनिवार्यता
विश्लेषण - संपूर्ण गद्यांश का निष्कर्ष यही है कि भौतिक प्रगति के साथ-साथ नैतिक और मानवीय मूल्यों का समन्वय आवश्यक है।

अपठित पद्यांश 1 (मानवीय संघर्ष और कर्तव्य बोध पर आधारित)

झुक-झुक कर जो पाँव पूजते, वे इतिहास बनाते हैं क्या?
अग्निपरीक्षा के पथ पर जो, शीश चढ़ाकर जाते हैं क्या?
सुख के मदिरालय में डूबे, जो जीवन का मोल न जानें,
वे तूफानों की छाती पर, अपनी रेखा खींच पाते हैं क्या?
राह कठिन हो, पग-पग पर हों, बाधाओं के गहरे घेरे,
ध्येय पथिक जो रुक जाता है, मंजिल तक वो पहुँच पाते हैं क्या?
श्रम के स्वेद-कणों से जो अपने भाग्य का अंक लिखते,
वे नश्वर दुनिया में अपनी अमिट छाप छोड़ जाते हैं क्या?
जलो मगर इस तरह कि जग में उजियारा फैल सके,
बुझने वाले दीपों से क्या तम के पंथ सँवर पाते हैं क्या?
कर्मवीर की यही परिभाषा, जीवन का संकेत यही है,
संघर्षों के बिना बताओ, कोई दीप प्रज्वलित पाते हैं क्या?

पद्यांश 1 के वैकल्पिक प्रश्न

प्रश्न 1- पद्यांश के अनुसार वास्तविक इतिहास कौन लोग बनाते हैं?

(A) जो दूसरों के चरण वंदना में जीवन बिताते हैं
(B) जो अग्निपरीक्षा के पथ पर अपना बलिदान और समर्पण देते हैं
(C) जो सुख-सुविधाओं के मदिरालय में मग्न रहते हैं
(D) जो संघर्षों से बचकर सुरक्षित मार्ग चुनते हैं
उत्तर - (B) जो अग्निपरीक्षा के पथ पर अपना बलिदान और समर्पण देते हैं
विश्लेषण - कविता की पंक्तियाँ बताती हैं कि कठिनाइयों और अग्निपरीक्षा के पथ पर आगे बढ़ने वाले ही इतिहास रचते हैं।

प्रश्न 2- 'तूफानों की छाती पर रेखा खींचना' इस मुहावरे/काव्यक्ति का क्या आशय है?

(A) तूफानी मौसम में चित्रकला करना
(B) अत्यधिक जोखिम भरे कार्यों में सफलता पाना या असाधारण साहस दिखाना
(C) हवा की दिशा को मोड़ने का प्रयास करना
(D) प्रकृति के प्रकोप से भयभीत हो जाना
उत्तर - (B) अत्यधिक जोखिम भरे कार्यों में सफलता पाना या असाधारण साहस दिखाना
विश्लेषण - यह काव्यक्ति विपरीत परिस्थितियों और भयंकर बाधाओं के बीच असाधारण पराक्रम प्रदर्शित करने का प्रतीक है।

प्रश्न 3- 'श्रम के स्वेद-कणों' से कवि का क्या तात्पर्य है?

(A) मेहनत और परिश्रम की पसीने की बूँदें
(B) मानसिक चिंता के आँसू
(C) शारीरिक थकान और विश्राम
(D) धन-दौलत के चमकते कण
उत्तर (A) मेहनत और परिश्रम की पसीने की बूँदें
विश्लेषण - 'स्वेद' का अर्थ पसीना होता है; अतः 'श्रम के स्वेद-कण' कठिन परिश्रम और उद्यमिता के द्योतक हैं।

प्रश्न 4- कवि ने किस प्रकार जलने का संदेश दिया है?

(A) जिससे केवल स्वयं का अस्तित्व समाप्त हो
(B) जिससे संपूर्ण संसार में प्रकाश और ज्ञान फैल सके
(C) जिससे समाज में ईर्ष्या और द्वेष की आग भड़के
(D) जिससे स्वार्थ सिद्धि का मार्ग प्रशस्त हो
उत्तर - (B) जिससे संपूर्ण संसार में प्रकाश और ज्ञान फैल सके
विश्लेषण - कविता में कहा गया है कि 'जलो मगर इस तरह कि जग में उजियारा फैल सके', जो परोपकार और त्याग का संदेश है।

प्रश्न 5- पद्यांश में प्रयुक्त 'तम' शब्द का पर्यायवाची निम्नलिखित में से कौन सा है?

(A) प्रकाश
(B) अंधकार
(C) अग्नि
(D) वायु
उत्तर - (B) अंधकार
विश्लेषण - 'तम' का तत्सम अर्थ अंधकार या अंधेरा होता है, जिसका विपरीत प्रकाश होता है।

प्रश्न 6- पद्यांश की भाषा की मुख्य विशेषता क्या है?

(A) दुरुद एवं क्लिष्ट फारसी शब्दावली
(B) ओजपूर्ण, प्रवाहमयी और प्रेरणादायक खड़ी बोली
(C) ग्रामीण लोक-बोली का अतिरेक
(D) केवल अंग्रेजी शब्दों का मिश्रण
उत्तर - (B) ओजपूर्ण, प्रवाहमयी और प्रेरणादायक खड़ी बोली
विश्लेषण - पद्यांश की शैली ओज गुण से युक्त तथा खड़ी बोली में अत्यंत प्रवाहमयी और प्रेरणाप्रद है।

प्रश्न 7- संपूर्ण पद्यांश का मूल संदेश क्या है?

(A) भाग्य के भरोसे बैठकर जीवन बिताना
(B) संघर्षों का सामना किए बिना सफलता की कामना करना
(C) कर्म, श्रम और पुरुषार्थ के बल पर ही जीवन को सार्थक बनाना
(D) सुख-सुविधाओं में लिप्त रहकर समय बिताना
उत्तर - (C) कर्म, श्रम और पुरुषार्थ के बल पर ही जीवन को सार्थक बनाना
विश्लेषण - पद्यांश संघर्ष और श्रम के महत्व को रेखांकित करते हुए कर्मवीर बनने की प्रेरणा देता है।

अपठित गद्यांश 2 (पर्यावरण संरक्षण और तात्कालिक चिंता पर आधारित)

आज संपूर्ण विश्व एक अभूतपूर्व पर्यावरणीय संकट के मुहाने पर खड़ा है। औद्योगिक क्रांति के आरंभ से लेकर वर्तमान समय तक जिस अंधाधुंध विकास मॉडल को हमने अपनाया है, उसने प्रकृति और मनुष्य के बीच के नाजुक संतुलन को बुरी तरह विचलित कर दिया है। वनों की अंधाधुंध कटाई, नदियों का प्रदूषित होना, ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएँ अब केवल भविष्य की आशंकाएँ नहीं, बल्कि हमारी वर्तमान वास्तविकता बन चुकी हैं। भारतीय मनीषा ने वेदों के काल से ही 'माता भूमः पुत्रोऽथ पृथिव्याः' का उद्घोष कर प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का पाठ पढ़ाया था। परंतु आधुनिकता की अंधी दौड़ में हमने प्रकृति को भोग्या मान लिया, जबकि वह हमारी पालनहार है। विकास की इस अंधी दौड़ में जैव विविधता का तेजी से ह्रास हुआ है, जिससे कई दुर्लभ प्रजातियाँ विलुप्त होने की कगार पर पहुँच चुकी हैं। यदि समय रहते हमने अपनी विकास रणनीतियों में पारिस्थितिकीय दृष्टिकोण (Ecological Approach) को शामिल नहीं किया, तो आगामी पीढ़ियों के लिए शुद्ध हवा और पीने योग्य पानी जैसी बुनियादी जरूरतें भी दुर्लभ हो जाएंगी। आवश्यकता इस बात की है कि विकास और पर्यावरण के बीच एक सार्थक संतुलन स्थापित किया जाए, जिसमें सतत विकास (Sustainable Development) का संकल्प केवल कागजी दस्तावेज न रहकर हमारी सामूहिक जीवनशैली का अभिन्न अंग बने।

गद्यांश 2 के वैकल्पिक प्रश्न

प्रश्न 1- वर्तमान में संपूर्ण विश्व किस प्रकार के संकट का सामना कर रहा है?

(A) आर्थिक मंदी और वित्तीय संकट
(B) अभूतपूर्व पर्यावरणीय और पारिस्थितिकीय संकट
(C) ऊर्जा के पारंपरिक स्रोतों की अधिकता
(D) वैश्विक स्तर पर जनसंख्या का न्यून होना
उत्तर - (B) अभूतपूर्व पर्यावरणीय और पारिस्थितिकीय संकट
विश्लेषण - गद्यांश की प्रथम पंक्ति ही स्पष्ट करती है कि आज संपूर्ण विश्व पर्यावरणीय संकट के मुहाने पर खड़ा है।

प्रश्न 2- भारतीय मनीषा ने प्राचीन काल में पृथ्वी के संबंध में क्या संदेश दिया था?

(A) पृथ्वी केवल दोहन के लिए है
(B) 'माता भूमः पुत्रोऽथ पृथिव्याः' अर्थात पृथ्वी हमारी माता है और हम इसके पुत्र हैं
(C) प्रकृति मनुष्य की अधीन है
(D) पर्यावरण संरक्षण का कोई महत्व नहीं है
उत्तर - (B) 'माता भूमः पुत्रोऽथ पृथिव्याः' अर्थात पृथ्वी हमारी माता है और हम इसके पुत्र हैं
विश्लेषण - गद्यांश में भारतीय संस्कृति के प्राचीन उद्घोष 'माता भूमः पुत्रोऽथ पृथिव्याः' का उल्लेख किया गया है।

प्रश्न 3- आधुनिक विकास मॉडल की सबसे बड़ी भूल क्या रही है?

(A) प्रकृति को अपनी पालनहार मानने के स्थान पर भोग्या मान लेना
(B) अत्यधिक कृत्रिम उपग्रहों का प्रक्षेपण करना
(C) अंतरिक्ष अनुसंधान पर अधिक धन खर्च करना
(D) कृषि क्षेत्रों को उद्योग विहीन करना
उत्तर - (A) प्रकृति को अपनी पालनहार मानने के स्थान पर भोग्या मान लेना
विश्लेषण - गद्यांश में कहा गया है कि आधुनिकता की दौड़ में हमने प्रकृति को भोग्या मान लिया जबकि वह हमारी पालनहार है।

प्रश्न 4- जैव विविधता के ह्रास होने से मुख्य रूप से क्या परिणाम सामने आया है?

(A) प्राकृतिक आपदाओं का पूर्णतः समाप्त होना
(B) दुर्लभ प्रजातियों का विलुप्त होने की कगार पर पहुँचना
(C) उद्योगों के उत्पादन में भारी वृद्धि
(D) मानवीय जीवन प्रत्याशा में वृद्धि
उत्तर - (B) दुर्लभ प्रजातियों का विलुप्त होने की कगार पर पहुँचना
विश्लेषण - गद्यांश स्पष्ट रूप से बताता है कि जैव विविधता के ह्रास से कई दुर्लभ प्रजातियाँ विलुप्त होने की कगार पर हैं।

प्रश्न 5- 'प्रदूषित' शब्द में मूल शब्द और प्रत्यय का सही संयोजन क्या है?

(A) प्र + दूषित
(B) दूषण + इत
(C) प्रदूषण + इत (या प्रत्यय जनित रूप)
(D) प्रदुष् + इत
उत्तर - (C) प्रदूषण + इत (या प्रत्यय जनित रूप)
विश्लेषण - 'प्रदूषण' मूल संज्ञा शब्द में 'इत' प्रत्यय लगने से 'प्रदूषित' विशेषण शब्द बनता है।

प्रश्न 6- 'दुर्लभ' शब्द का विलोम शब्द निम्नलिखित में से कौन सा है?

(A) सुलभ
(B) अलभ्य
(C) दुर्लभता
(D) प्राप्यहीन
उत्तर - (A) सुलभ
विश्लेषण - 'दुर्लभ' (जो कठिनाई से मिले) का सही विलोम 'सुलभ' (जो आसानी से मिल जाए) होता है।

प्रश्न 7- 'सतत विकास' (Sustainable Development) से क्या तात्पर्य है?

(A) ऐसा विकास जो केवल वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करे
(B) पर्यावरण को क्षति पहुँचाए बिना भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया विकास
(C) वनों को काटकर बड़े-बड़े शहर बसाना
(D) औद्योगिक इकाइयों का अंधाधुंध विस्तार करना
उत्तर - (B) पर्यावरण को क्षति पहुँचाए बिना भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया विकास
विश्लेषण - सतत विकास का मूल अर्थ पर्यावरण संरक्षण और विकास के मध्य संतुलन स्थापित करते हुए भावी पीढ़ी का ध्यान रखना है।

प्रश्न 8- गद्यांश का शीर्षक निर्धारण करने के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प कौन सा होगा?

(A) औद्योगिक क्रांति के लाभ
(B) पर्यावरण संकट और सतत विकास की अनिवार्यता
(C) प्राचीन भारतीय वन व्यवस्था
(D) वैश्विक तापमान में वृद्धि के कारण
उत्तर - (B) पर्यावरण संकट और सतत विकास की अनिवार्यता
विश्लेषण - संपूर्ण गद्यांश पर्यावरण संकट की गंभीरता और उसके समाधान हेतु सतत विकास पर केंद्रित है।

अपठित पद्यांश 2 (समय और कर्तव्य निष्ठा पर आधारित)

बीत गया जो समय, कभी वह लौटकर वापस आता है क्या?
कल के कलैंडر का पन्ना, जीवन में फिर से गाता है क्या?
अवसर की धारा बहती है, जो इसको थाम नहीं पाते,
जीवन भर पछताने के सिवा, उनके हिस्से कुछ आता है क्या?
समय किसी का मीत नहीं है, यह तो अपनी चाल चलेगा,
बहा ले जाएगा महलों को, या झोपड़ियों को ढालेगा।
जो इस महाकाल की गति को पहचान समय से चल पाता,
काल चक्र के पहियों नीचे वह कभी न पिसता-मलता है क्या?
उठो, सँभलो और पहचानो इस जीवन के हर एक क्षण को,
पल-पल की इस मणिका से सींचो अपने श्रम के कण को।
कल किसने देखा है मित्रों, आज ही सब कुछ करना होगा,
कर्तव्य पथ पर चलकर तुमको इतिहास नया गढ़ना होगा।

पद्यांश 2 के वैकल्पिक प्रश्न

प्रश्न 1- पद्यांश के आरंभ में कवि ने किस सार्वभौमिक सत्य को रेखांकित किया है?

(A) बीता हुआ समय कभी वापस लौटकर नहीं आता
(B) धन और संपत्ति फिर से कमाई जा सकती है
(C) कलैंडर के पन्ने दोबारा जोड़े जा सकते हैं
(D) अवसर बार-बार द्वार खटखटाते हैं
उत्तर - (A) बीता हुआ समय कभी वापस लौटकर नहीं आता
विश्लेषण - कविता की पहली पंक्ति पूछती है कि बीता समय कभी लौटकर आता है क्या, जिसका अर्थ है कि समय अनिवर्त्य है।

प्रश्न 2- अवसर की धारा को न थाम पाने वाले लोगों की क्या दशा होती है?

(A) वे जीवनभर सफलता के शिखर पर पहुँचते हैं
(B) वे जीवनभर पछताने के सिवा कुछ नहीं पाते
(C) उन्हें दूसरा बेहतरीन अवसर प्राप्त हो जाता है
(D) वे समय के साथ नए युग का निर्माण करते हैं
उत्तर - (B) वे जीवनभर पछताने के सिवा कुछ नहीं पाते
विश्लेषण - पद्यांश में स्पष्ट है कि अवसर चूक जाने पर व्यक्ति को केवल पश्चाताप ही मिलता है।

प्रश्न 3- 'समय किसी का मीत नहीं है' इस कथन का क्या आशय है?

(A) समय किसी से मित्रता नहीं करना चाहता
(B) समय किसी के लिए नहीं रुकता और अपनी गति से निरंतर चलता है
(C) समय केवल धनी लोगों का मित्र होता है
(D) समय का कोई निश्चित स्वभाव नहीं होता
उत्तर - (B) समय किसी के लिए नहीं रुकता और अपनी गति से निरंतर चलता है
विश्लेषण - समय अनवरत बहने वाली धारा है, यह राजा हो या रंक, किसी के पक्ष में नहीं रुकता।

प्रश्न 4- काल चक्र के पहियों के नीचे न पिसने के लिए क्या उपाय बताया गया है?

(A) समय की गति को पहचानकर उसके साथ कदमताल करना
(B) समय के विपरीत दिशा में अपनी गति रखना
(C) महलों और झोपड़ियों का निर्माण करना
(D) भाग्य के भरोसे बैठ जाना
उत्तर - (A) समय की गति को पहचानकर उसके साथ कदमताल करना
विश्लेषण - जो व्यक्ति समय की चाल को समझकर तदनुसार आचरण करता है, वह समय की मार से बच जाता है।

प्रश्न 5- पद्यांश में प्रयुक्त 'मीत' शब्द का तत्सम या मानक रूप क्या है?

(A) मित्र
(B) शत्रु
(C) मार्ग
(D) मणिका
उत्तर - (A) मित्र
विश्लेषण - 'मीत' तद्भव शब्द है जिसका तत्सम रूप 'मित्र' होता है।

प्रश्न 6- पद्यांश में प्रयुक्त 'क्षण' शब्द का बहुवचन रूप क्या होगा?

(A) क्षणों
(B) क्षण
(C) क्षणा
(D) क्षणियाँ
उत्तर - (B) क्षण
विश्लेषण - 'क्षण' अकारांत पुल्लिंग शब्द है जिसका बहुवचन रूप प्रयोग में 'क्षण' ही रहता है (जैसे एक क्षण, अनेक क्षण)।

प्रश्न 7- कवि का अंतिम संदेश पाठकों के लिए क्या है?

(A) कल पर अपने महत्वपूर्ण कार्य टाल देना चाहिए
(B) वर्तमान (आज) को महत्व देते हुए कर्तव्य पथ पर नया इतिहास रचना चाहिए
(C) केवल भाग्य के निर्णय की प्रतीक्षा करनी चाहिए
(D) अतीत की स्मृतियों में जीवन बिताना चाहिए
उत्तर - (B) वर्तमान (आज) को महत्व देते हुए कर्तव्य पथ पर नया इतिहास रचना चाहिए
विश्लेषण - अंतिम पंक्तियाँ कहती हैं कि 'कल किसने देखा है मित्रों, आज ही सब कुछ करना होगा और इतिहास नया गढ़ना होगा'।

अपठित गद्यांश 3 (शिक्षा और मानवीय मूल्यों के समन्वय पर आधारित)

शिक्षा किसी भी राष्ट्र की रीढ़ होती है, किंतु शिक्षा का वास्तविक स्वरूप केवल साक्षरता या उपाधियाँ प्राप्त करना भर नहीं है। आज के प्रतिस्पर्धी युग में हम शिक्षा को रोजगार प्राप्ति का एक मात्र यंत्र मान बैठे हैं, जिसके फलस्वरूप शिक्षण संस्थानों में नैतिक मूल्यों का ह्रास तेजी से हो रहा है। स्वामी विवेकानंद ने बहुत पहले कहा था कि 'ऐसी शिक्षा चाहिए जिससे चरित्र का निर्माण हो, मन का बल बढ़े, बुद्धि का विकास हो और जिससे मनुष्य अपने पैरों पर खड़ा हो सके।' आज हमारी शिक्षा प्रणाली डिग्रियाँ तो धड़ल्ले से बाँट रही है, परंतु संवेदना, करुणा, सहिष्णुता और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे बुनियादी मानवीय गुणों को पाठ्यक्रम के हाशिए पर धकेल दिया गया है। एक आदर्श शिक्षक का कर्तव्य केवल विद्यार्थियों के मस्तिष्क में तथ्यों को ठूँसना नहीं है, बल्कि उनके भीतर छिपी हुई जिज्ञासा और आलोचनात्मक चिंतन (Critical Thinking) को जागृत करना है। जब तक शिक्षा के साथ नैतिकता का संपुट नहीं जुड़ेगा, तब तक तकनीकी रूप से उन्नत समाज भी अंदर से खोखला ही रहेगा। इसलिए यह अनिवार्य हो गया है कि हम अपनी शिक्षा प्रणाली का पुनरुत्थान करें और उसमें मूल्य-आधारित शिक्षा (Value-based Education) को सर्वोच्च प्राथमिकता दें ताकि भावी पीढ़ी राष्ट्र निर्माण में अपनी सार्थक भूमिका निभा सके।

गद्यांश 3 के वैकल्पिक प्रश्न

प्रश्न 1- गद्यांश के अनुसार शिक्षा का वास्तविक स्वरूप क्या नहीं है?

(A) चरित्र और बुद्धि का विकास करना
(B) केवल साक्षरता या उपाधियाँ (डिग्रियाँ) प्राप्त करना
(C) आलोचनात्मक चिंतन को जागृत करना
(D) मानवीय मूल्यों का संवर्धन करना
उत्तर - (B) केवल साक्षरता या उपाधियाँ (डिग्रियाँ) प्राप्त करना
विश्लेषण - गद्यांश में स्पष्ट किया गया है कि शिक्षा का अर्थ केवल साक्षर होना या उपाधियाँ पाना नहीं है।

प्रश्न 2- स्वामी विवेकानंद के अनुसार आदर्श शिक्षा का मुख्य उद्देश्य क्या होना चाहिए?

(A) केवल उच्च पद और आर्थिक संपन्नता प्राप्त करना
(B) चरित्र निर्माण, मन का बल और बुद्धि का विकास करना
(C) आधुनिक मशीनों का संचालन सीखना
(D) प्राचीन परंपराओं का बिना सोचे अनुकरण करना
उत्तर - (B) चरित्र निर्माण, मन का बल और बुद्धि का विकास करना
विश्लेषण - उद्धृत कथन के अनुसार शिक्षा वह है जिससे चरित्र निर्माण हो, मन का बल और बुद्धि का विकास हो।

प्रश्न 3- वर्तमान शिक्षा प्रणाली में किस बात की सबसे बड़ी कमी देखी जा रही है?

(A) तकनीकी संसाधनों की अत्यधिक कमी
(B) डिग्रियाँ मिलने के साथ मानवीय मूल्यों और संवेदनाओं का ह्रास
(C) विद्यालयों और महाविद्यालयों की संख्या में कमी
(D) शिक्षकों के प्रशिक्षण का पूर्ण अभाव
उत्तर - (B) डिग्रियाँ मिलने के साथ मानवीय मूल्यों और संवेदनाओं का ह्रास
विश्लेषण - गद्यांश में कहा गया है कि डिग्रियाँ तो मिल रही हैं किंतु संवेदना और नैतिकता हाशिए पर चली गई है।

प्रश्न 4- एक आदर्श शिक्षक का मुख्य कर्तव्य गद्यांश के अनुसार क्या होना चाहिए?

(A) विद्यार्थियों के मस्तिष्क में केवल तथ्य रटाना
(B) विद्यार्थियों में जिज्ञासा और आलोचनात्मक चिंतन को जागृत करना
(C) परीक्षा में अधिकतम अंक लाने के शॉर्टकट बताना
(D) पाठ्यपुस्तकों को शब्दशः याद कराना
उत्तर - (B) विद्यार्थियों में जिज्ञासा और आलोचनात्मक चिंतन को जागृत करना
विश्लेषण - गद्यांश के अनुसार शिक्षक का कार्य तथ्यों को ठूँसना नहीं बल्कि जिज्ञासा और क्रिटिकल थिंकिंग जगाना है।

प्रश्न 5- 'प्रतिस्पर्धी' शब्द में मूल शब्द क्या है?

(A) स्पर्धा
(B) प्रतिस्पर्धा
(C) पर्धा
(D) स्पर्धात्मक
उत्तर - (A) स्पर्धा (साथ ही प्रति उपसर्ग)
विश्लेषण - 'प्रतिस्पर्धा' मूल भाववाचक संज्ञा में 'ई' प्रत्यय जुड़ने से 'प्रतिस्पर्धी' विशेषण बनता है, जिसमें मूल शब्द 'स्पर्धा' है।

प्रश्न 6- 'सहिष्णुता' शब्द का सही विलोम शब्द क्या होगा?

(A) असहिष्णुता
(B) सहिष्णु
(C) उदासीनता
(D) कठोरता
उत्तर - (A) असहिष्णुता
विश्लेषण - 'सहिष्णुता' (सहनशीलता) का सटीक विलोम 'असहिष्णुता' होता है।

प्रश्न 7- गद्यांश में प्रयुक्त 'संपुट' शब्द का निकटतम अर्थ क्या है?

(A) मिश्रण या जुड़ाव
(B) अलगाव
(C) विरोध
(D) संकुचन
उत्तर - (A) मिश्रण या जुड़ाव
विश्लेषण - 'नैतिकता का संपुट' का अर्थ शिक्षा के साथ नैतिकता के मेल या जुड़ाव से है।

प्रश्न 8- गद्यांश का मुख्य संदेश क्या है?

(A) तकनीकी शिक्षा का पूर्ण बहिष्कार करना
(B) शिक्षा में मूल्य-आधारित दृष्टिकोण को सर्वोच्च प्राथमिकता देना
(C) केवल पारंपरिक गुरुकुल शिक्षा प्रणाली अपनाना
(D) उपाधियों के वितरण पर रोक लगाना
उत्तर - (B) शिक्षा में मूल्य-आधारित दृष्टिकोण को सर्वोच्च प्राथमिकता देना
विश्लेषण - गद्यांश का निष्कर्ष मूल्य-आधारित शिक्षा की अनिवार्यता पर जोर देता है।

अपठित पद्यांश 3 (राष्ट्रभक्ति और बलिदान की भावना पर आधारित)

शीश झुके या कटे देश का, ऐसा कभी न होने देंगे,
इस पावन माटी के आँचल को, मलिन कभी न होने देंगे।
जो सपूत इस धरा की खातिर, सूली पर भी चढ़ जाते हैं,
उनके बलिदानों की गाथा, इतिहास कभी न खोने देंगे।
माना कि आज डगर कठिन है, और तिमिर ने घेरा है,
पर निश्चय के सूरज से हम, लाएँगे नया सबेरा है।
लहू पसीना एक करेंगे, इस भारत की हर क्यारी में,
समरसता का दीप जलाकर, भर देंगे हर फुलवारी में।
जो टकराएगा इस भारत की एकता और शान से,
उसका अहंकार मिटा देंगे हम अपनी आन-बान से।
ऐ वतन तेरे चरणों में, सर्वस्व समर्पित अपना है,
तुझे विश्व गुरु के आसन पर देखना हमारा सपना है।

पद्यांश 3 के वैकल्पिक प्रश्न

प्रश्न 1- कवि ने पद्यांश के आरंभ में देश के संबंध में क्या प्रतिज्ञा व्यक्त की है?

(A) देश का मस्तक कभी झुकने या कटने नहीं देंगे और इसकी माटी को मैला नहीं होने देंगे
(B) देश की सीमाओं को सिकोड़ देंगे
(C) माटी के आँचल को विदेशी ताकतों को सौंप देंगे
(D) देश के इतिहास को भुला देंगे
उत्तर - (A) देश का मस्तक कभी झुकने या कटने नहीं देंगे और इसकी माटी को मैला नहीं होने देंगे
विश्लेषण - प्रथम दो पंक्तियाँ राष्ट्र के सम्मान और पवित्रता की रक्षा की दृढ़ प्रतिज्ञा को व्यक्त करती हैं।

प्रश्न 2- सपूतों के बलिदान के संबंध में कवि का क्या दृष्टिकोण है?

(A) उनके बलिदानों को समय के साथ भुला देना चाहिए
(B) उनके बलिदानों की गाथा को इतिहास कभी खोने नहीं देगा
(C) बलिदान केवल युद्ध काल तक सीमित हैं
(D) उनके बलिदानों का कोई सार्थक परिणाम नहीं होता
(-बी) उनके बलिदानों की गाथा को इतिहास कभी खोने नहीं देगा
विश्लेषण - कविता में कहा गया है कि शहीदों के बलिदान अमर रहते हैं और इतिहास उन्हें सहेज कर रखता है।

प्रश्न 3- 'तिमिर' शब्द का क्या अर्थ है और कवि ने इसे कैसे दूर करने की बात कही है?

(A) प्रकाश; इसे दीपक से दूर करेंगे
(B) अंधकार; इसे निश्चय के सूरज (दृढ़ संकल्प) से दूर करेंगे
(C) बादल; इसे वर्षा से दूर करेंगे
(D) शत्रु; इसे युद्ध से दूर करेंगे
(-बी) अंधकार; इसे निश्चय के सूरज (दृढ़ संकल्प) से दूर करेंगे
विश्लेषण - 'तिमिर' का अर्थ अंधकार है जिसे कवि ने संकल्प रूपी सूरज से समाप्त करने का संकल्प लिया है।

प्रश्न 4- भारत को किस आसन पर देखने का सपना कवि ने देखा है?

(A) विश्व गुरु के आसन पर
(B) आर्थिक रूप से आश्रित आसन पर
(C) मौन और तटस्थ आसन पर
(D) विलासिता के आसन पर
उत्तर - (A) विश्व गुरु के आसन पर
विश्लेषण - अंतिम पंक्ति में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि भारत को 'विश्व गुरु' के आसन पर देखना कवि का सपना है।

प्रश्न 5- पद्यांश में प्रयुक्त 'सपूत' शब्द का विलोम शब्द क्या होगा?

(A) कपूत
(B) नालायक
(C) सपूतहीन
(D) कुपुत्र
उत्तर - (A) कपूत
विश्लेषण - 'सपूत' (योग्य पुत्र) का सटीक विलोम शब्द 'कपूत' होता है।

प्रश्न 6- 'माटी' शब्द किस प्रकार का शब्द है?

(A) तत्सम
(B) तद्भव
(C) देशज
(D) विदेशी
(-बी) तद्भव
विश्लेषण - 'माटी' तद्भव शब्द है जिसका तत्सम रूप 'मृत्तिकार / मृत्तिका' होता है।

प्रश्न 7- पद्यांश का मुख्य स्वर (रस) कौन सा है?

(A) शृंगार रस
(B) वीर रस / ओजस्वी राष्ट्रप्रेम
(C) करुण रस
(D) हास्य रस
(-बी) वीर रस / ओजस्वी राष्ट्रप्रेम
विश्लेषण - संपूर्ण पद्यांश राष्ट्र के प्रति समर्पण, आन-बान और बलिदान के भावों से ओत-प्रोत होने के कारण वीर रस प्रधान है।

अपठित गद्यांश 4 (भाषा, संस्कृति और वैश्वीकरण के प्रभाव पर आधारित)

भाषा केवल संवाद का माध्यम मात्र नहीं है, बल्कि वह किसी जाति और संस्कृति की संपूर्ण मानसिक संरचना, उसकी अस्मिता और उसके इतिहास की वाहक होती है। जब कोई भाषा संकट में पड़ती है, तो उस संस्कृति का संपूर्ण लोक-आकाश भी धीरे-धीरे धुंधला पड़ने लगता है। आज वैश्वीकरण के इस दौर में अंग्रेजी और अन्य वैश्विक भाषाओं का प्रभाव इतनी तीव्र गति से बढ़ रहा है कि हमारी अपनी मातृभाषाएँ और क्षेत्रीय बोलियाँ अपने ही घरों में उपेक्षित हो रही हैं। यह विडंबना ही है कि हम आधुनिक बनने की होड़ में अपनी जड़ों को ही काट रहे हैं। भाषा का यह संकट केवल शब्दों का संकट नहीं, बल्कि सांस्कृतिक स्मृति का लोप होना है। लोकगीत, लोककथाएँ, मुहावरे और लोकोक्तियाँ जो सदियों के अनुभव से सींची गई हैं, वे आधुनिक शिक्षा की चकाचौंध में दम तोड़ रही हैं। किसी भी राष्ट्र की सृजनात्मक ऊर्जा विदेशी भाषाओं के उधार लिए गए ढाँचों से पुष्पित-पल्लवित नहीं हो सकती; उसके लिए अपनी मातृभाषा की उर्वर भूमि का होना अनिवार्य है। यदि हमें अपनी मौलिकता और सांस्कृतिक विविधता को बचाए रखना है, तो हमें अपनी भाषाओं के प्रति न केवल गर्व का भाव रखना होगा बल्कि उन्हें शिक्षा, विज्ञान और रोजगार की मुख्यधारा में भी पूरी सक्रियता से जोड़ना होगा।

गद्यांश 4 के वैकल्पिक प्रश्न

प्रश्न 1- गद्यांश के अनुसार भाषा की वास्तविक भूमिका क्या है?

(A) केवल एक कार्यालयी संवाद उपकरण होना
(B) किसी संस्कृति की मानसिक संरचना, अस्मिता और इतिहास की वाहक होना
(C) केवल विदेशी व्यापार को सुगम बनाना
(D) तकनीकी कोड लिखना
उत्तर - (B) किसी संस्कृति की मानसिक संरचना, अस्मिता और इतिहास की वाहक होना
विश्लेषण - गद्यांश की पहली पंक्ति बताती है कि भाषा संवाद के साथ-साथ संस्कृति और अस्मिता की वाहक होती है।

प्रश्न 2- वैश्वीकरण के दौर में मातृभाषाओं के समक्ष क्या संकट उत्पन्न हो गया है?

(A) वे अपने ही घरों में उपेक्षित हो रही हैं
(B) उनका व्याकरण अधिक कठिन हो गया है
(C) उनका शब्दकोश बहुत बड़ा हो गया है
(D) उनका प्रयोग वैज्ञानिक अनुसंधानों में अनिवार्य हो गया है
उत्तर - (A) वे अपने ही घरों में उपेक्षित हो रही हैं
विश्लेषण - गद्यांश में उल्लेख है कि वैश्विक भाषाओं के प्रभाव के कारण मातृभाषाएँ अपने ही घरों में उपेक्षित हो रही हैं।

प्रश्न 3- भाषा का संकट गद्यांश के अनुसार वस्तुतः किसका संकट है?

(A) केवल व्याकरणिक नियमों का
(B) सांस्कृतिक स्मृति और लोक अनुभवों के लोप होने का
(C) विदेशी लिपियों के प्रसार का
(D) आर्थिक मंदी का
(-बी) सांस्कृतिक स्मृति और लोक अनुभवों के लोप होने का
विश्लेषण - गद्यांश स्पष्ट करता है कि भाषा का संकट केवल शब्दों का नहीं बल्कि सांस्कृतिक स्मृति का लोप होना है।

प्रश्न 4- किसी राष्ट्र की सृजनात्मक ऊर्जा के विकास के लिए क्या अनिवार्य माना गया है?

(A) पूरी तरह विदेशी भाषाओं पर निर्भर रहना
(B) अपनी मातृभाषा की उर्वर भूमि का होना
(C) स्थानीय बोलियों को प्रतिबंधित करना
(D) केवल तकनीकी शिक्षा ग्रहण करना
उत्तर - (B) अपनी मातृभाषा की उर्वर भूमि का होना
विश्लेषण - गद्यांश में कहा गया है कि सृजनात्मक ऊर्जा विदेशी ढाँचों से नहीं बल्कि मातृभाषा की उर्वर भूमि से पुष्पित होती है।

प्रश्न 5- 'मातृभाषा' शब्द किस प्रकार का समास है?

(A) द्वंद्व समास
(B) तत्पुरुष समास (मातृ की भाषा / माता की भाषा - संबंध तत्पुरुष)
(C) बहुव्रीहि समास
(D) कर्मधारय समास
उत्तर - (B) तत्पुरुष समास (मातृ की भाषा / माता की भाषा - संबंध तत्पुरुष)
विश्लेषण - 'मातृभाषा' का विग्रह 'माता की भाषा' होता है, अतः यहाँ संबंध तत्पुरुष समास है।

प्रश्न 6- 'उपेक्षित' शब्द का मूल शब्द और प्रत्यय क्या है?

(A) उपेक्षा + इत
(B) उप + ईक्षित
(C) उपेक्षा + त
(D) उपेक्षित + अ
उत्तर - (A) उपेक्षा + इत
विश्लेषण - 'उपेक्षा' मूल संज्ञा में 'इत' प्रत्यय जुड़ने से 'उपेक्षित' विशेषण बनता है।

प्रश्न 7- मातृभाषाओं को पुनर्जीवित करने के लिए गद्यांश में क्या उपाय सुझाया गया है?

(A) उन्हें केवल घरों तक सीमित रखना
(B) उन्हें शिक्षा, विज्ञान और रोजगार की मुख्यधारा से जोड़ना
(C) विदेशी भाषाओं के प्रयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना
(D) लोकगीतों को संग्रहालयों में बंद करना
(-बी) उन्हें शिक्षा, विज्ञान और रोजगार की मुख्यधारा से जोड़ना
विश्लेषण - गद्यांश के अंत में कहा गया है कि भाषाओं को बचाने के लिए उन्हें शिक्षा, विज्ञान और रोजगार से जोड़ना होगा।

प्रश्न 8- गद्यांश का केंद्रीय विषय क्या है?

(A) अंग्रेजी भाषा का व्याकरण
(B) भाषा, संस्कृति का संबंध और मातृभाषाओं का संरक्षण
(C) वैश्वीकरण के आर्थिक लाभ
(D) लोककथाओं का संकलन
उत्तर - (B) भाषा, संस्कृति का संबंध और मातृभाषाओं का संरक्षण
विश्लेषण - संपूर्ण गद्यांश भाषा और संस्कृति के अंतर्संबंध तथा मातृभाषा संरक्षण की आवश्यकता पर केंद्रित है।

अपठित पद्यांश 4 (नैतिक मूल्य और मानवीय संवेदना पर आधारित)

पत्थर की मूरतों में हमने भगवान को ढूँढा बहुत,
अपनों की आँखों में छिपे इंसान को ढूँढा बहुत।
मंदिर और मस्जिद की इन लंबी दीवारों के परे,
मजहब के इस बाज़ार में ईमान को ढूँढा बहुत।
फूलों की इस महक में भी अब भेद की खुशबू है क्यों?
हर आँख में सहमा हुआ सा कोई सूखा आँसू है क्यों?
जो बाँटता फिरता था कल तक दिलों को प्रेम की छाँव में,
आज उसी मनुष्य के भीतर नफ़रत का भँवर क्यूँ है?
उठो और बुझा दो इस वैमनस्य की हर एक चिनगारी को,
गले लगा लो फिर से आकर इस धरती के महतारी को।
प्रेम से बढ़कर न कोई ग्रन्थ है न वेद है कोई,
मानवता ही धर्म है अपना, बाकी सब भेद झोई।

पद्यांश 4 के वैकल्पिक प्रश्न

प्रश्न 1- कवि ने किन दो स्थानों पर भगवान और इंसान को ढूँढने की बात कही है?

(A) आकाश और पाताल में
(B) पत्थर की मूरतों में और अपनों की आँखों में
(C) ग्रंथों और पुस्तकालयों में
(D) जंगलों और पर्वतों पर
उत्तर - (B) पत्थर की मूरतों में और अपनों की आँखों में
विश्लेषण - कविता की पहली पंक्ति में 'पत्थर की मूरतों में भगवान' और 'अपनों की आँखों में इंसान' ढूँढने का उल्लेख है।

प्रश्न 2- 'मजहब के इस बाज़ार में ईमान को ढूँढा बहुत' इस पंक्ति का क्या व्यंग्य है?

(A) धार्मिक स्थलों पर वस्तुएँ बिकती हैं
(B) धर्म के नाम पर पाखंड बढ़ गया है और सच्ची नैतिकता या ईमानदारी दुर्लभ हो गई है
(C) व्यापार में ईमानदारी घट गई है
(D) सभी लोग धार्मिक हो गए हैं
(-बी) धर्म के नाम पर पाखंड बढ़ गया है और सच्ची नैतिकता या ईमानदारी दुर्लभ हो गई है
विश्लेषण - यह पंक्ति धार्मिक संकीर्णता और बाज़ारूपन पर करारा व्यंग्य करती है जहाँ सच्चा ईमान गायब हो चुका है।

प्रश्न 3- मनुष्य के भीतर आज किस चीज़ का भँवर उत्पन्न हो गया है?

(A) प्रेम और करुणा का
(B) नफ़रत और वैमनस्य का
(C) ज्ञान और विज्ञान का
(D) संतोष और आनंद का
उत्तर - (B) नफ़रत और वैमनस्य का
विश्लेषण - कविता में प्रश्न किया गया है कि प्रेम बाँटने वाले मनुष्य के भीतर आज नफ़रत का भँवर क्यों है।

प्रश्न 4- कवि के अनुसार सबसे बड़ा ग्रंथ या वेद कौन सा है?

(A) वेद और पुराण
(B) प्रेम और मानवता
(C) इतिहास और भूगोल
(D) विधि और संविधान
उत्तर - (B) प्रेम और मानवता
विश्लेषण - अंतिम पंक्तियाँ स्पष्ट रूप से घोषित करती हैं कि 'प्रेम से बढ़कर न कोई ग्रंथ है और मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है'।

प्रश्न 5- पद्यांश में प्रयुक्त 'वैमनस्य' शब्द का विलोम शब्द क्या है?

(A) सौमनस्य
(B) अमनस्य
(C) विमनस्य
(D) ईर्ष्या
उत्तर - (A) सौमनस्य
विश्लेषण - 'वैमनस्य' (मनमुटाव या शत्रुता) का सटीक विलोम शब्द 'सौमनस्य' (सद्भाव या मित्रता) होता है।

प्रश्न 6- 'मूरतों' शब्द का एकवचन रूप निम्नलिखित में से क्या है?

(A) मूरत
(B) मूर्ति
(C) मूरति
(D) मूरता
उत्तर - (A) मूरत (या मूर्ति)
विश्लेषण - पद्यांश में प्रयुक्त 'मूरतों' बहुवचन रूप का मूल तद्भव एकवचन 'मूरत' है।

प्रश्न 7- संपूर्ण पद्यांश का केंद्रीय संदेश क्या है?

(A) धार्मिक दीवारों को मजबूत करना
(B) संप्रदायवाद और नफ़रत को छोड़कर मानवता तथा प्रेम का संदेश अपनाना
(C) पत्थरों की पूजा करना
(D) बाज़ारों की व्यवस्था सुधारना
(-बी) संप्रदायवाद और नफ़रत को छोड़कर मानवता तथा प्रेम का संदेश अपनाना
विश्लेषण - कविता का संपूर्ण संदेश मानवता को सर्वोपरि मानते हुए आपसी प्रेम और सद्भाव स्थापित करने पर जोर देता है।

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लेख / जानकारी का विषय क्षेत्र : शिक्षा एवं परीक्षा तैयारी (हिन्दी भाषा और साहित्य)

लेख / जानकारी का स्रोत : माध्यमिक शिक्षक चयन परीक्षा पाठ्यक्रम एवं भाषायी मानक अध्ययन पद्धति

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