टीईटी प्राथमिक शिक्षक योग्यता परीक्षा हेतु संस्कृत भाषा अभ्यास

यहाँ प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा के पाठ्यक्रम के अनुसार संस्कृत भाषा में भाषायी समझ और अवबोध के लिए एक गद्यांश और एक पद्यांश उनके हिंदी अनुवाद और वैकल्पिक प्रश्नों सहित दिए गए हैं।


प्रथम भाग: गद्यांश

अस्मिन् संसारी सर्वे जनाः सुखम् इच्छन्ति। सुखस्य मूलं धर्मः अस्ति। धर्मः सत्यवादितायाम्, परोपकारे, सद्चारे च निहितः भवति। यदा मनुष्यः परहितं करोति, तदा तस्य मनसि शान्तिः उत्पद्यते। समाजस्य विकासाय भ्रातृत्वभावना अतीव आवश्यकी अस्ति। यदि वयं मिलित्वा वसामः तर्हि कोऽपि क्लेशः अस्मान् पराजयितुं न शक्नोति। अतः अस्माभिः सदैव सत्यस्य मार्गः अनुसरणीयः।
(हिंदी अनुवाद): इस संसार में सभी लोग सुख चाहते हैं। सुख का मूल धर्म है। धर्म सत्यवादिता, परोपकार और सदाचार में निहित होता है। जब मनुष्य दूसरे का हित करता है, तब उसके मन में शांति उत्पन्न होती है। समाज के विकास के लिए भाईचारे की भावना अत्यंत आवश्यक है। यदि हम मिलकर रहते हैं तो कोई भी कष्ट हमें पराजित नहीं कर सकता। अतः हम सबको सदैव सत्य के मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।

गद्यांश पर आधारित प्रश्न

प्रश्न 1. संसारी सर्वे जनाः किम् इच्छन्ति?
(A) दुःखम् (दुःख)
(B) सुखम् (सुख)
(C) भयम् (भय)
(D) शोकम् (शोक)

प्रश्न 2. सुखस्य मूलं किम् अस्ति?
(A) धर्मः (धर्म)
(B) अधर्मः (अधर्म)
(C) लोभः (लोभ)
(D) क्रोधः (क्रोध)

प्रश्न 3. धर्मः कुत्र निहितः भवति?
(A) केवलं धने (केवल धन में)
(B) सत्यवादितायाम् परोपकारे सद्चारे च (सत्यवादिता, परोपकार और सदाचार में)
(C) आलस्ये (आलस्य में)
(D) छले च (और छल में)

प्रश्न 4. मनुष्यस्य मनसि शान्तिः कदा उत्पद्यते?
(A) यदा सः परहितं करोति (जब वह दूसरे का हित करता है)
(B) यदा सः स्वार्थं करोति (जब वह स्वार्थ करता है)
(C) यदा सः वञ्चयति (जब वह ठगता है)
(D) यदा सः सुप्तः भवति (जब वह सोता है)

प्रश्न 5. समाजस्य विकासाय का भावना अतीव आवश्यकी अस्ति?
(A) शत्रुताभावना (शत्रुता की भावना)
(B) भ्रातृत्वभावना (भाईचारे की भावना)
(C) स्वार्थभावना (स्वार्थ की भावना)
(D) अहङ्कारभावना (अहंकार की भावना)

प्रश्न 6. कः अस्मान् पराजयितुं न शक्नोति?
(A) कोऽपि क्लेशः (कोई भी कष्ट)
(B) शत्रुः (शत्रु)
(C) रोगः (रोग)
(D) दारिद्र्यम् (गरीबी)

प्रश्न 7. 'सत्यस्य' अस्मिन् पदे का विभक्तिः वचनं च अस्ति?
(A) प्रथमा विभक्तिः, एकवचनम् (प्रथमा विभक्ति, एकवचन)
(B) षष्ठी विभक्तिः, एकवचनम् (षष्ठी विभक्ति, एकवचन)
(C) तृतीया विभक्तिः, बहुवचनम् (तृतीया विभक्ति, बहुवचन)
(D) द्वितीया विभक्तिः, एकवचनम् (द्वितीया विभक्ति, एकवचन)

प्रश्न 8. 'इच्छन्ति' क्रियापदे कः लकारः अस्ति?
(A) ल्लट् लकारः (वर्तमान काल)
(B) लृट् लकारः (भविष्यत् काल)
(C) लोट् लकारः (आज्ञाचूचक)
(D) लङ्ग लकारः (भूतकाल)


द्वितीय भाग: पद्यांश

उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः。
न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥
विद्या ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम्。
पात्रत्वात् धनमाप्नोति धनाद्धर्मं ततः सुखम्॥
(हिंदी अनुवाद): परिश्रम से ही कार्य सिद्ध होते हैं, केवल इच्छा करने से नहीं। सोए हुए सिंह के मुख में स्वयं मृग प्रवेश नहीं करते। विद्या विनय देती है, विनय से पात्रता आती है, पात्रता से धन प्राप्त होता है, धन से धर्म और उससे सुख प्राप्त होता है।

पद्यांश पर आधारित प्रश्न

प्रश्न 1. कानि उद्यमेन सिध्यन्ति?
(A) मनोरथाः (मन की इच्छाएँ)
(B) कार्याणि (कार्य)
(C) स्वप्नाः (सपने)
(D) आलस्यानि (आलस्य)

प्रश्न 2. कस्य मुखे मृगाः न प्रविशन्ति?
(A) जाग्रतः सिंहस्य (जागते हुए शेर के)
(B) सुप्तस्य सिंहस्य (सोए हुए शेर के)
(C) बलवान्सिंहस्य (बलवान शेर के)
(D) वृद्धसिंहस्य (बूढ़े शेर के)

प्रश्न 3. विद्या किम् ददाति?
(A) धनम् (धन)
(B) विनयम् (विनय / नम्रता)
(C) बलम् (बल)
(D) यशः (यश)

प्रश्न 4. विनयात् किम् प्राप्यते?
(A) पात्रता (योग्यता / पात्रता)
(B) मूर्खता (मूर्खता)
(C) गर्वः (घमंड)
(D) अज्ञानम् (अज्ञान)

प्रश्न 5. पात्रतात् नरः किम् आप्नोति?
(A) धनम् (धन)
(B) दुःखम् (दुःख)
(C) शत्रुताम् (शत्रुता)
(D) रोगम् (रोग)

प्रश्न 6. 'उद्यमेन' अस्मिन् पदे का विभक्तिः अस्ति?
(A) प्रथमा (प्रथमा)
(B) तृतीया (तृतीया)
(C) चतुर्थी (चतुर्थी)
(D) पञ्चमी (पञ्चमी)

प्रश्न 7. 'सुप्तस्य' इत्यस्य पदस्य विलोमपदं किम् अस्ति?
(A) मृतस्य (मरे हुए का)
(B) जाग्रतः (जागते हुए का)
(C) चलितस्य (चले हुए का)
(D) हसितस्य (हँसे हुए का)


उत्तर शीट

प्रथम भाग (गद्यांश आधारित उत्तर):
प्रश्न 1. उत्तर (B)
प्रश्न 2. उत्तर (A)
प्रश्न 3. उत्तर (B)
प्रश्न 4. उत्तर (A)
प्रश्न 5. उत्तर (B)
प्रश्न 6. उत्तर (A)
प्रश्न 7. उत्तर (B)
प्रश्न 8. उत्तर (A)

द्वितीय भाग (पद्यांश आधारित उत्तर):
प्रश्न 1. उत्तर (B)
प्रश्न 2. उत्तर (B)
प्रश्न 3. उत्तर (B)
प्रश्न 4. उत्तर (A)
प्रश्न 5. उत्तर (A)
प्रश्न 6. उत्तर (B)
प्रश्न 7. उत्तर (B)